Friday, June 21, 2019

إلى أي مدى يثق الناس باللقاحات؟

يحذر الخبراء من انعدام الثقة العام باللقاحات، الأمر الذي يعني تراجع العالم خطوة في مجال مكافحة الأمراض المعدية المميتة التي يمكن الوقاية منها.
وأظهرت أكبر دراسة عالمية أجريت لاستطلاع رأي الأشخاص بشأن التطعيم تراجع الثقة على نحو مثير للقلق في بعض المناطق.
وشملت الدراسة التي أجرتها مؤسسة "وليكوم تراست" استجابة ما يزيد على 140 ألف شخص من أكثر من 140 دولة.
يأتي ذلك في الوقت الذي تدرج فيه منظمة الصحة العالمية حاليا الشعور بالتردد في التطعيم باستخدام اللقاحات ضمن أكبر عشرة تهديدات تواجه الصحة العالمية.
وكانت مؤسسة "ويلكوم غلوبال مونيتور" قد أجرت مسوحا تمثيلية شملت 142 دولة، وتناولت موضوعات المسوح: الثقة بالعلوم والعلماء والمعلومات الصحية، ومستويات الفهم والاهتمام بالعلوم والصحة، والمواقف تجاه التطعيم ضد الأمراض بشكل عام.
ويكشف استطلاع الرأي وجود عدد كبير من الأشخاص يقولون إن لديهم ثقة أو ثقة ضئيلة في عمليات التطعيم باللقاحات.
وجاءت الإجابات ردا على سؤال يتعلق بما إذا كانت اللقاحات آمنة:
  • 79 في المئة "إلى حد ما" أو "أوافق بشدة".
  • 14 في المئة لا أوافق أو لا أرفض أو "لا أعرف".
وكانت الإجابات ردا على سؤال يتعلق بما إذا كانوا يعتقدون أن اللقاحات فعالة:
  • 84 في المئة أوافق إما "بشدة" أو "إلى حد ما".

Monday, June 17, 2019

मुज़फ़्फ़रपुर में बच्चों की मौत पर बेबसी छुपा नहीं पाए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने रविवार को बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले का दौरा किया.
मुज़फ़्फ़रपुर में इंसेफ़लाइटिस बुखार के चलते बीते कुछ दिनों में कई दर्जन बच्चों की मौत हो चुकी है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लेने के बाद कहा कि डॉक्टरों की टीम सराहनीय कार्य कर रही है.
हर्षवर्धन ने कहा, "मैंने लगभग 100 मरीज़ों यानी बच्चों और उनके माता-पिता से बात की है. एक एक बच्चे को, स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते नहीं बल्कि डॉक्टर होने के नाते, देखने का प्रयास किया है. बच्चों की केस शीट का भी अध्ययन किया है. डॉक्टरों से उनके मरीज़ों के बारे में विस्तार से बात करने की कोशिश की है."
उन्होंने कहा कि इस बात का हमें बहुत दुख है कि इस बार भी ये मामले देखने को मिले हैं, हालांकि, पिछले वर्षों के मुक़ाबले इस बार ऐसे मामलों की संख्या में कमी आई है.
मुज़फ़्फ़रपुर मेडिकल कॉलेज में मौजूद पत्रकारों ने इतने बच्चों की मौत को लेकर सवाल किए.
एक पत्रकार ने आईसीयू वॉर्ड के डॉक्टर के साथ हुई अपनी बातचीत के आधार पर सवाल किया, "मैंने डॉक्टर से बात की है. उन्होंने मुझे बताया कि वे दवाओं की कमी, प्रशिक्षित स्टाफ़ और उपकरणों की तंगी से जूझ रहे हैं."
इस सवाल पर हर्षवर्धन ने कहा, "मैंने सभी डॉक्टरों से बात की है और मुझे किसी ने कोई ख़ास दवा उपलब्ध न होने से जुड़ी कोई बात नहीं बताई है. लेकिन इस बारे में यहां के सीएमओ आपको बेहतर बता सकते हैं. मैंने कहा है कि इसी कैंपस में 100 बेड का एक स्टेट ऑफ़ द आर्ट पीडियाट्रिक आईसीयू वार्ड बनाया जाए. और इसके लिए केंद्र सरकार आर्थिक मदद देगी."
इसके बाद पत्रकारों ने सवाल किया कि साल 2014 में भी आश्वासन दिए गए थे, इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ.
इस पर हर्षवर्धन ने कहा, "हमारी सरकार ने काफ़ी काम किया है, देश भर में 21 एम्स खड़े किए हैं और इस मुद्दे का रेडिकल समाधान करने की कोशिश की जा रही है."
इसके बाद जब हर्षवर्धन से सवाल किया गया कि इतने बच्चों की मौत के लिए कौन ज़िम्मेदार है.
हर्षवर्धन ने कहा, "विषम परिस्थितियों के बावजूद अस्पताल के डॉक्टर बच्चों का अच्छी तरह से ध्यान रख रहे हैं लेकिन कष्टदायक परिस्थितियों में हमने जिन बच्चों को खो दिया है, उनके परिवारों के प्रति हमारी सरकार संवेदना जताती है."
इसके बाद जब पत्रकारों ने सवाल किया कि बच्चों की मौत के लिए कौन ज़िम्मेदार है क्योंकि कहीं न कहीं तो चूक हुई होगी?
इस सवाल पर हर्षवर्धन ने कहा, "अगर आप समझने की कोशिश करेंगे तो आपको समझ में आएगा. क्योंकि आलोचना करने के लिए कुछ भी आलोचना की जा सकती है, लेकिन मैंने खुद देखा है कि यहां के डॉक्टर कितनी विषम परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और ये बेहद ही सराहनीय है."
इसके बाद पत्रकारों ने केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे के अब तक मुज़फ़्फ़रपुर नहीं आने पर सवाल किया.
पत्रकारों ने पूछा कि चौबे केंद्र सरकार में इस सूबे का प्रतिनिधित्व करते हैं फिर अब तक वे क्यों नहीं आए, क्या वे बच्चों की मौत का आंकड़ा इतना बढ़ने का इंतज़ार कर रहे थे.
इस पर अश्विनी चौबे ने कहा कि आप लोग कृपया इतने बड़े मुद्दे को छोटी-मोटी घटनाओं में न समेटें.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हर्षवर्धन अश्विनी चौबे को चुप कराने की कोशिश करते हुए दिखाई दिए.
पत्रकारों ने कहा कि ये कोई छोटी बात नहीं है कि इस घटना के इतने दिन बाद आप यहां आए हैं तो अश्विनी चौबे ने कहा कि आप लोग बहुत छोटी बात कर रहे हैं.
हालांकि जब हर्षवर्धन बोल रहे थे तब उनके जूनियर मंत्री कई बार ऊंगते हुए भी दिखाई दिए.
इसके बाद अस्पताल में दवाइयां न होने का मुद्दा एक बार फिर उठा तो मेडिकल कॉलेज के सीएमओ ने माइक हाथ में लेते हुए कहा कि उन्होंने खुद दवाइयों को दिखाया है.
सीएमओ ने कहा, "मुझे नहीं पता कि आईसीयू के डॉक्टर ने किस आधार पर आपको ये बताया कि दवाएं नहीं हैं क्योंकि मैंने खुद आपको वो दवाएं दिखाई हैं."
इसके बाद हर्षवर्धन से सवाल किया गया कि आपने कहा है कि इस समस्या से निजात के लिए जागरूकता अभियान की भारी ज़रूरत है और अश्विनी चौबे ने कहा था कि चुनाव के चलते इस बार जागरूकता अभियान बाधित हुए हैं. ऐसे में आप क्या कहना चाहेंगे.
इस सवाल पर हर्षवर्धन ने असहज होते हुए जागरुकता अभियानों को रुटीन कार्यक्रम बताते हुए कहा कि अब हो गया बस...