现代农业技术和生产技术、消费者需求以及大型零售业等因素都助长了农作物的单一化发展。而这种发展的负面影响就是减少了基因多样性,作物更容易遭受病虫害和环境压力的影响。
中国一直被认为是农作物多样性的中心,在全球具有重要意义。农作物的种类包括稻米、大豆、葡萄、香蕉、柑橘类和核果类等。中国野生植物多样性异常丰富,包含了2万多种本土开花植物,其中相当一部分都能作为物种改良的基因供体。但是,这些具有巨大潜在价值的物种直到今天也没有全部得到认定。
参考先前出版的中国植物学著作(即《中国高等植物名录》和《中国生物多样性红色名录》),再运用先前欧洲研究获得的数据和知识,我们的研究已经列出了800多种中国本土野生植物。利用这些物种可以对28种在中国乃至全球都非常重要的粮食作物进行改良,使其能够抵御气候变化的不利影响。
值得注意的是,其中42%的物种是中国独有的,至少有17%的物种遭受到来自农林间作、基础设施发展以及栖息地丧失和退化的严重威胁,其中16种作物属野生近亲。作为中国独有的野生物种,一旦濒危将带来全球性的影响。
上述物种产于中国各地,但云南、广西、四川、海南和广东等省拥有的特有以及濒危植物品种最多,因而最引人注目。
这些野生植物品种被称为“作物野生近缘种”(简称 ),包括作物生长在野生栖息地各种环境条件下的祖先种和亲近种。因此, 的基因高度多样,植物育种专家可将其适应特性转移给农作物,改善作物对极端环境条件和各种病虫害的耐受性,从而有助于维持粮食作物的产量。此外, 还可用于改善作物的营养和销售质量。
中国用 改良作物的成功案例包括:用野生稻( )增强稻谷对干旱和铝毒害的耐受性;用野生大豆( )提高大豆的蛋白质含量;用山葡萄( )改善葡萄的耐寒性。
当前作物的野生种为什么如此重要呢?气候变化造成了极端和意想不到的环境条件,迫使植物育种专家不得不找到能够适应这些压力并保持产量的新品种。由于CWR具有基因多样性,因此,它们在提高作物适应性方面的重要性日益提高。利用CWR对作物进行改良,可以使作物在气候变化引发的不断加重的环境压力下(如干旱、洪水和新的病虫害,以及频率和强度不断增加的气候变动)仍然保持产量。
但讽刺的是,与农作物一样,野生近缘种的种群受到的威胁不仅来自气候变化,也来自其它各种危害野生植物原生栖息地的人为压力。
国际组织(如联合国粮农组织)和条约(如《生物多样性公约》和《粮农组织粮食和农业植物遗传资源国际条约》)都指明了CWR是提高作物多样性和保护粮食安全的重要资源。但 远远没有得到足够的保护,无论是已经保存在基因库中的非原位种还是仍在其自然栖息地的原位种。
中国拥有比欧洲还要丰富的植物种类,而且拥有全球重要粮食作物的 。作为可提供作物改良植物基因资源的国家,中国对于全球具有非常重要的意义。如今,我们既然已经确定了中国的优先作物野生近缘种以及它们生长的一些热点地区,中国有关部门和利益相关方就必须尽快制定落实保护战略保证未来的粮食安全。
舍拉格·凯尔参与了伯明翰大学与植物研究所、中国农业科学院以及中国农业大学关于CWR的联合研究项目,该项目由英国环境、食品和农村事务部与中国农业部资助,在中英可持续农业创新协作网( )框架下进行。
Thursday, August 30, 2018
Tuesday, August 28, 2018
छत्तीसगढ़ में जो हुआ वो ग़लत क्यों है?
स्टिस दीपक मिश्रा के राज्य आगमन पर रमन सिंह सरकार को बड़े बड़े
होर्डिंग्स के ज़रिए हर ख़ास ओ आम को ये बताने की क्या ज़रूरत पड़ गई कि वो
वाक़ई ख़ुश है?
इसमें जस्टिस दीपक मिश्रा कुछ नहीं कर सकते थे पर राज्य सरकार की मंशा छिपाए नहीं छिपती क्योंकि कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ के एक गंभीर मामले में वो मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अदालत में अपना बचाव करने के लिए पेश हो रही है.
सिर्फ़ इसी वजह से जस्टिस मिश्रा के स्वागत में होर्डिंग्स लगाने के अर्थ बदल जाते हैं.
छह अगस्त को छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के कोंटा क्षेत्र में हुई एक कथित मुठभेड़ में राज्य सरकार ने 15 माओवादियों को मारने का दावा किया था.
एक मानवाधिकार संगठन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है और छत्तीसगढ़ सरकार पर आम गाँव वालों को मार डालने का आरोप लगाया है.
छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे फ़र्ज़ी याचिका बताया है और फ़ैसला अब जस्टिस दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच को करना है.
अगर ऐसे होर्डिंग्स एसोसिएशन या वकीलों की कोई संस्था लगवाती तो बहुत सामान्य सी बात होती, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐसा करके ख़ुद जस्टिस दीपक मिश्रा के लिए असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है.
पुरानी कहावत है कि अदालत का काम न्याय करना ही नहीं है बल्कि ये दिखाना भी है कि न्याय किया जा रहा है.
जस्टिस मिश्रा के सामने ऐसे कई मामले हैं जिनपर उन्हें न्याय भी करना है और न्याय होते हुए दिखाना भी है.
जब ऐसे मामलों की गहन सुनवाई चल रही हो तब इस विवाद से जुड़ी बीजेपी और उसकी सरकारों से उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वो सुनवाई कर रहे न्यायाधीश से दूरी बनाकर चले?
रमन सिंह की सरकार ने जस्टिस दीपक मिश्रा के स्वागत में होर्डिंग्स लगवाकर उनका स्वागत नहीं किया बल्कि न्याय की कुर्सी पर राजनीति की छाया डालने की कोशिश की है.
इमरजेंसी में इंदिरा गाँधी ने न्यायपालिका को सत्ता के लोहे से बने बूट तले दबा दिया था और — चंद अपवादों को छोड़कर — मनमाने फ़ैसले करवाए.
इमरजेंसी को इसीलिए भारतीय जनतंत्र के इतिहास की सियाह तारीख़ के तौर पर देखा जाता है और उस सियाह तारीख़ का दोहराव कोई नहीं चाहता.
इसलिए न्यायमूर्तियों को ही तय करना होगा कि वो न्याय की मूर्तियों को खंडित होने से कैसे बचाएँगे.
सुप्रीम कोर्ट और सरकार की खींचतान, समझिए आख़िर क्या चल रहा है?
चीफ़ जस्टिस को प्रो-बीजेपी या प्रो-कांग्रेस कहना कितना उचित?
इसमें जस्टिस दीपक मिश्रा कुछ नहीं कर सकते थे पर राज्य सरकार की मंशा छिपाए नहीं छिपती क्योंकि कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ के एक गंभीर मामले में वो मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अदालत में अपना बचाव करने के लिए पेश हो रही है.
सिर्फ़ इसी वजह से जस्टिस मिश्रा के स्वागत में होर्डिंग्स लगाने के अर्थ बदल जाते हैं.
छह अगस्त को छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के कोंटा क्षेत्र में हुई एक कथित मुठभेड़ में राज्य सरकार ने 15 माओवादियों को मारने का दावा किया था.
एक मानवाधिकार संगठन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है और छत्तीसगढ़ सरकार पर आम गाँव वालों को मार डालने का आरोप लगाया है.
छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे फ़र्ज़ी याचिका बताया है और फ़ैसला अब जस्टिस दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच को करना है.
अगर ऐसे होर्डिंग्स एसोसिएशन या वकीलों की कोई संस्था लगवाती तो बहुत सामान्य सी बात होती, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐसा करके ख़ुद जस्टिस दीपक मिश्रा के लिए असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है.
पुरानी कहावत है कि अदालत का काम न्याय करना ही नहीं है बल्कि ये दिखाना भी है कि न्याय किया जा रहा है.
जस्टिस मिश्रा के सामने ऐसे कई मामले हैं जिनपर उन्हें न्याय भी करना है और न्याय होते हुए दिखाना भी है.
जब ऐसे मामलों की गहन सुनवाई चल रही हो तब इस विवाद से जुड़ी बीजेपी और उसकी सरकारों से उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वो सुनवाई कर रहे न्यायाधीश से दूरी बनाकर चले?
रमन सिंह की सरकार ने जस्टिस दीपक मिश्रा के स्वागत में होर्डिंग्स लगवाकर उनका स्वागत नहीं किया बल्कि न्याय की कुर्सी पर राजनीति की छाया डालने की कोशिश की है.
इमरजेंसी में इंदिरा गाँधी ने न्यायपालिका को सत्ता के लोहे से बने बूट तले दबा दिया था और — चंद अपवादों को छोड़कर — मनमाने फ़ैसले करवाए.
इमरजेंसी को इसीलिए भारतीय जनतंत्र के इतिहास की सियाह तारीख़ के तौर पर देखा जाता है और उस सियाह तारीख़ का दोहराव कोई नहीं चाहता.
इसलिए न्यायमूर्तियों को ही तय करना होगा कि वो न्याय की मूर्तियों को खंडित होने से कैसे बचाएँगे.
सुप्रीम कोर्ट और सरकार की खींचतान, समझिए आख़िर क्या चल रहा है?
चीफ़ जस्टिस को प्रो-बीजेपी या प्रो-कांग्रेस कहना कितना उचित?
Friday, August 17, 2018
均摊减排任务是否会在欧盟引发更多矛盾?
近日,欧盟发布了2021到2030年年度温室气体减排目标提案,覆盖交通、建筑、农业、废物处理、土地利用和林业等多个领域。
欧盟温室气体排放总量中约有45%来自于发电和工业部门。这部分排放已经纳入了欧盟排放权交易系统( ),并且该系统目前正根据2030年目标进行升级。 新的提案涵盖了经济领域的其他部门,并计划在2030年之前将欧盟温室气体排放总量在1990年的基础上降低40%。
这份新提议中涉及的目标以及实现机制充分汲取了《京都议定书》以及欧盟排放权交易系统的经验,但是其中一些内容在欧盟成员国家和相关环境组织中引起了轩然大波。
欧盟各国首脑已就2014年整体气候目标达成一致。而在过去18个月里,欧盟委员会(欧盟的执行机构)就如何在欧盟内落实非排放权交易系统减排任务分担,与各成员国进行了广泛协商。
如今,这份所谓的《减排责任共担规定》已经初步成型。观察人士认为,在最终目标达成之前,各方应该还要经历一番长久的讨价还价。然而我们依旧可以看出,文件草案已经对某些致力于加快接受减排任务的国家给予了适当的让步优惠。
欧盟委员会提议各国采用独立的减排目标,比如瑞典的目标是在2005年的基础上减少40%的排放,因为目前该国可再生能源发展顺利,而且碳减排意愿强烈;而保加利亚的减排总量则为零,因为该国目前还在努力实现基础设施更新换代,以便尽早降低对俄罗斯天然气进口的依赖。
相比于之前的2013-2020年减排目标,本次提案相对更加复杂,因为欧盟需要根据各成员国经济实力和日益增长的减排意愿,综合平衡各方减排任务分配。
各个国家目标的制定主要依据的是各国的人均国内生产总值。德国、法国和英国这样的发达经济体自然要承担不少重任,但波兰已经对完成任务的难度表示了不满。
波兰环境部的一份声明指出,7%的减排目标“很难实现”,因为波兰根本无力承担这样的任务。
为此,欧盟委员会也特意出台了一些通融机制,让这些最富裕的国家在实现目标的过程中也能获得一些灵活性。
首先,提案第一次将土地利用方式纳入其中。每个国家都会根据植被碳汇得到一个减排配额,这样如果有政府认为提案涉及的减排任务难以实现,欧盟委员会还会依据碳汇给予适当的目标份额减免。
其次,各国温室气体减排速度如果比提案要求的更快,就可以将未使用的配额“存”起来留到以后使用。同样,如果减排速度低于年度目标要求,各国也可以提前“预支”配额,上限为其年减排目标的5%。
提案中的这种排放量储存和出借机制,实际上是仿效了《京都议定书》框架下的国家级碳排放交易机制以及欧盟排放权交易系统。
然而,与这种机制配套的政策就不那么妙了:提案同时也规定,所有在2013年到2020年期间积累的排放额度盈余都会被一笔勾销。汤森路透碳点公司预计其涉及总额度可能高达15亿吨,而且将对意大利、法国和西班牙造成重大影响。
第三个新突破就是在所谓的“非贸易”领域和欧盟排放权交易系统之间建立了联系。依据本次欧盟提案,包括瑞典、荷兰和爱尔兰在内的9个欧盟国家都将有机会用其在欧盟碳排放交易排放机制中的配额,来等量抵消其非欧盟排放权交易系统领域的排放量,抵消总量不超过一亿吨。
欧盟委员会表示,这9个国家目前承担了很大一部分的减排份额,因此,通过欧盟减排配额来抵消部分“非交易系统领域”的减排量为这些国家提供了更多的运作灵活性,同时方便减少市场中的配额盈余(据悉目前这一数字可能高达20亿吨)。
这些灵活机制的最终目的其实就是减轻某些国家的负担。
不过也有环境组织指出,本次的《减排责任共担指导意见》可能与欧盟在巴黎气候协议中的说法相左。欧盟2030年之前在2005年的基础上减排40%的目标单独听起来的确很有魄力,但是在巴黎协议中提到的2050年减排目标更有雄心,后者减排总量可是高达90%到95%。
环境组织 认为,欧盟完全可以实现50%的减排目标,而提案中所谓的“灵活机制”却可能导致某些国家根本不需要进行减排。
的菲尔·麦克唐纳( )表示:“总的来看,这些灵活机制可能会在整体减排预算中增加4.2亿吨的二氧化碳排放量。也就是说,欧洲整体根本不需要进行减排。其中,新成员国机制漏洞将增加3900万吨,排放权交易系统将增加1亿吨,而[土地利用模式]则会增加2.8亿吨。”
而且该提案还明确将英国包括其中,并为英国设定了2021-2030年间减排37%的目标。英国很有可能于2017年就脱欧问题展开谈判,这就意味着欧盟委员会必须据此重新计算总体减排目标。
欧盟将陷入了两难境地:英国一向都是推动气候环保运动的积极分子,且先后发布了一系列颇有魄力的目标。而英国脱欧事实已定,那么英国的这些减排重担又该如何分配到各个国家呢?
目前来看,欧盟只能根据现有各国能力,将英国的减排任务分配给各成员国,同时增加相应的灵活机制,帮助那些相对困难的经济体更好地实现减排目标。
要想成功应对英国脱欧和欧盟成员国谈判的巨大压力,欧盟委员会就需要在《减排责任共担规定》的协商过程中付出更多的努力。
欧盟温室气体排放总量中约有45%来自于发电和工业部门。这部分排放已经纳入了欧盟排放权交易系统( ),并且该系统目前正根据2030年目标进行升级。 新的提案涵盖了经济领域的其他部门,并计划在2030年之前将欧盟温室气体排放总量在1990年的基础上降低40%。
这份新提议中涉及的目标以及实现机制充分汲取了《京都议定书》以及欧盟排放权交易系统的经验,但是其中一些内容在欧盟成员国家和相关环境组织中引起了轩然大波。
欧盟各国首脑已就2014年整体气候目标达成一致。而在过去18个月里,欧盟委员会(欧盟的执行机构)就如何在欧盟内落实非排放权交易系统减排任务分担,与各成员国进行了广泛协商。
如今,这份所谓的《减排责任共担规定》已经初步成型。观察人士认为,在最终目标达成之前,各方应该还要经历一番长久的讨价还价。然而我们依旧可以看出,文件草案已经对某些致力于加快接受减排任务的国家给予了适当的让步优惠。
欧盟委员会提议各国采用独立的减排目标,比如瑞典的目标是在2005年的基础上减少40%的排放,因为目前该国可再生能源发展顺利,而且碳减排意愿强烈;而保加利亚的减排总量则为零,因为该国目前还在努力实现基础设施更新换代,以便尽早降低对俄罗斯天然气进口的依赖。
相比于之前的2013-2020年减排目标,本次提案相对更加复杂,因为欧盟需要根据各成员国经济实力和日益增长的减排意愿,综合平衡各方减排任务分配。
各个国家目标的制定主要依据的是各国的人均国内生产总值。德国、法国和英国这样的发达经济体自然要承担不少重任,但波兰已经对完成任务的难度表示了不满。
波兰环境部的一份声明指出,7%的减排目标“很难实现”,因为波兰根本无力承担这样的任务。
为此,欧盟委员会也特意出台了一些通融机制,让这些最富裕的国家在实现目标的过程中也能获得一些灵活性。
首先,提案第一次将土地利用方式纳入其中。每个国家都会根据植被碳汇得到一个减排配额,这样如果有政府认为提案涉及的减排任务难以实现,欧盟委员会还会依据碳汇给予适当的目标份额减免。
其次,各国温室气体减排速度如果比提案要求的更快,就可以将未使用的配额“存”起来留到以后使用。同样,如果减排速度低于年度目标要求,各国也可以提前“预支”配额,上限为其年减排目标的5%。
提案中的这种排放量储存和出借机制,实际上是仿效了《京都议定书》框架下的国家级碳排放交易机制以及欧盟排放权交易系统。
然而,与这种机制配套的政策就不那么妙了:提案同时也规定,所有在2013年到2020年期间积累的排放额度盈余都会被一笔勾销。汤森路透碳点公司预计其涉及总额度可能高达15亿吨,而且将对意大利、法国和西班牙造成重大影响。
第三个新突破就是在所谓的“非贸易”领域和欧盟排放权交易系统之间建立了联系。依据本次欧盟提案,包括瑞典、荷兰和爱尔兰在内的9个欧盟国家都将有机会用其在欧盟碳排放交易排放机制中的配额,来等量抵消其非欧盟排放权交易系统领域的排放量,抵消总量不超过一亿吨。
欧盟委员会表示,这9个国家目前承担了很大一部分的减排份额,因此,通过欧盟减排配额来抵消部分“非交易系统领域”的减排量为这些国家提供了更多的运作灵活性,同时方便减少市场中的配额盈余(据悉目前这一数字可能高达20亿吨)。
这些灵活机制的最终目的其实就是减轻某些国家的负担。
不过也有环境组织指出,本次的《减排责任共担指导意见》可能与欧盟在巴黎气候协议中的说法相左。欧盟2030年之前在2005年的基础上减排40%的目标单独听起来的确很有魄力,但是在巴黎协议中提到的2050年减排目标更有雄心,后者减排总量可是高达90%到95%。
环境组织 认为,欧盟完全可以实现50%的减排目标,而提案中所谓的“灵活机制”却可能导致某些国家根本不需要进行减排。
的菲尔·麦克唐纳( )表示:“总的来看,这些灵活机制可能会在整体减排预算中增加4.2亿吨的二氧化碳排放量。也就是说,欧洲整体根本不需要进行减排。其中,新成员国机制漏洞将增加3900万吨,排放权交易系统将增加1亿吨,而[土地利用模式]则会增加2.8亿吨。”
而且该提案还明确将英国包括其中,并为英国设定了2021-2030年间减排37%的目标。英国很有可能于2017年就脱欧问题展开谈判,这就意味着欧盟委员会必须据此重新计算总体减排目标。
欧盟将陷入了两难境地:英国一向都是推动气候环保运动的积极分子,且先后发布了一系列颇有魄力的目标。而英国脱欧事实已定,那么英国的这些减排重担又该如何分配到各个国家呢?
目前来看,欧盟只能根据现有各国能力,将英国的减排任务分配给各成员国,同时增加相应的灵活机制,帮助那些相对困难的经济体更好地实现减排目标。
要想成功应对英国脱欧和欧盟成员国谈判的巨大压力,欧盟委员会就需要在《减排责任共担规定》的协商过程中付出更多的努力。
Thursday, August 16, 2018
帕特里夏将出任联合国首席气候官员
两会之后,环保部的内部结构终于调整为以水、土壤、大气这几大环境要素为核心的管理体制。在国合会()等智囊机构呼吁建议了多年之后,这一设想在环保部长陈吉宁上任一年后终于得以实现。这不仅是环保部内部机构职能管理调整改革的里程碑事件,也为今后中国的以环境质量为导向的环境管理奠定了更科学的管理基础。治水。以水环境管理为例,不仅涉及到污染防治司的饮用水处、流域处、海洋处的职能,还涉及到污染物总量控制司的水总量处、统计处的职能,两个司的职能严重交叉重叠。此外,水环境规划还涉及到规划司规划处的职能;与水相关的法律法规涉及到政策法规司的法规处职能;与水有关的科技标准涉及到科技司的技术处、标准处、健康处的职能;水环境监测涉及到环境监测司环境治理检测处、污染源监测处的职能等等。环保部内部对水的管理复杂程度不逊于部委之间的九龙治水问题。大气、土壤也存在同样的问题。改革后的体制,以环境要素为核心的管理则理顺了这种关系。《水污染防治法》、《水十条》等法规政策以后就由环保部水司这一个部门牵头负责贯彻落实,其它横向部门只提供辅助性支持。
以水、土、气环境要素为核心的管理,是否会削弱生态系统的完整性和要素之间的相互协调性?也有人为此担心,认为水、土、气都是生态系统的重要环境要素,如此人为地把环境要素分开管理可能破坏了生态系统的完整性。还有人担心此次机构职能调整后,水、土、气要素之间的相互协调会出现问题,部门之间各自为政,让企业无所适从。事实上,水、土、气虽然都是生态系统的重要组成部分,但又是相对地相互独立的环境要素。本次改革改的是有关水、土、气政策法律法规的制定与实施,而非对企业的具体环境监管。在企业层面的环境监管是由地方环境执法监察队伍实施的,此次改革既不涉及国家层面的环境监察局的改革,更不涉及到地方环境监察执法队伍的改革,不会出现到企业只查水而不管土,或者只查气而不查水的情况。只不过是把过去从污染防治司内协调升级为部内协调而已。
环保部内部机构职能调整是否已完全到位了?此次设置水、土、气司是非常重要的机构改革步骤,今后的环保部内部机构职能改革还需要继续深化。建议在目前以水、土壤、大气司的基础上,继续强化以环境要素为核心的一条龙纵向管理,同时调减、压缩、弱化横向职能部门。为了建立现代环境治理体系,需要学习美国等国际先进经验,应当进一步打散传统的条块分割管理,将其它司、处的相关职能也都划分到水、土壤、大气司里面,包括:科技司中的水、土、气标准制定的职能等;政策法规司中的《水污染防治法》、《大气污染防治法》、《土壤污染防治法》核心内容起草的职能等;规划司中的水、土、气专项规划的职能等。
环保部内部机构职能管理调整、环保系统管理体制改革还有很多工作要做。我们期待着陈吉宁部长能够继续改革,在充分学习国际先进经验与避免教训的基础上,探索出中国特色的环境管理新道路。
以水、土、气环境要素为核心的管理,是否会削弱生态系统的完整性和要素之间的相互协调性?也有人为此担心,认为水、土、气都是生态系统的重要环境要素,如此人为地把环境要素分开管理可能破坏了生态系统的完整性。还有人担心此次机构职能调整后,水、土、气要素之间的相互协调会出现问题,部门之间各自为政,让企业无所适从。事实上,水、土、气虽然都是生态系统的重要组成部分,但又是相对地相互独立的环境要素。本次改革改的是有关水、土、气政策法律法规的制定与实施,而非对企业的具体环境监管。在企业层面的环境监管是由地方环境执法监察队伍实施的,此次改革既不涉及国家层面的环境监察局的改革,更不涉及到地方环境监察执法队伍的改革,不会出现到企业只查水而不管土,或者只查气而不查水的情况。只不过是把过去从污染防治司内协调升级为部内协调而已。
环保部内部机构职能调整是否已完全到位了?此次设置水、土、气司是非常重要的机构改革步骤,今后的环保部内部机构职能改革还需要继续深化。建议在目前以水、土壤、大气司的基础上,继续强化以环境要素为核心的一条龙纵向管理,同时调减、压缩、弱化横向职能部门。为了建立现代环境治理体系,需要学习美国等国际先进经验,应当进一步打散传统的条块分割管理,将其它司、处的相关职能也都划分到水、土壤、大气司里面,包括:科技司中的水、土、气标准制定的职能等;政策法规司中的《水污染防治法》、《大气污染防治法》、《土壤污染防治法》核心内容起草的职能等;规划司中的水、土、气专项规划的职能等。
去年12月,各国成功在巴黎达成气候变化协议;而今天,预计将有至少150个国家的代表齐聚纽约,参加《巴黎协定》的高级别签署仪式。
《协定》建立了一个旨在限制全球平均气温上升的新型框架,是各国对抗气候变化进程中迈出的重要一步。
但如果在2020年之前,各国不能在实质上提升抗击气候变化的决心,《巴黎协定》面临着在完全生效前就惨遭破坏的风险。
由于目前各国的减排承诺远没有达到《协定》目标的要求,未来五年将会至关重要。
即将召开的G7和G20峰会应该为强化各主要排放国2020年之前的减排决心奠定基础。
新制度在灵活性和包容性方面有着很多优点。《巴黎协定》建立了具有法律约束力的框架,到2020年,只要有不少于55个国家加入、且其温室气体排放量占全球排放总量不少于55%,这一框架就将生效。签约仪式是《协定》生效过程中非常重要的第一步。
《协定》还确立了新的长期目标,即“确保全球平均气温较工业化前水平升高幅度控制在2摄氏度之内,并力争将升温控制在1.5摄氏度之内”。
这是各国首次就升温幅度控制在1.5摄氏度的问题达成一致。对于低洼岛屿等最易受到气候变化影响的国家而言,这是关系到国家未来存亡的大事。
同时,新制度也复杂混乱,且缺乏统一标准;虽然各国在巴黎大会上提出的自主贡献较之从前是一个很大的提升,但目前减排承诺总量和控制气温上升不超过2摄氏度所需的减排量之间仍存在很大差距,且这一差距还将持续扩大。
一项分析显示,如果目前的减排承诺量保持不变,那么排放差距就将从目前的每年约30亿吨二氧化碳当量(GtCO2e)增长至2025年的每年约110亿吨二氧化碳当量,这一数字甚至超出了目前中国的排放量。
因此,为了提高长期目标达成的可能性,2020年《巴黎协定》生效之时,各国应大幅提高各自的减排目标。
各国代表还一致同意从2018年起建立一个“能够促进对话的机制”,作为达成上述目标的一项核心工作,为各国提供机会重新审核自身的自主贡献,从而确定到2020年之时是否将扩大贡献额或者保持不变。
各国提升2020年之前减排决心的工作并不均衡。中国宣称自己的减排量预计将超出2020年目标的要求,甚至有望超出其2030年的贡献额。
但欧盟委员会关于“巴黎大会之后”的交流实际上忽视了2020年以前的机会,其制定的计划可能会保持2030年的减排目标不变直至期满。日本也因减排决心过低而遭到诟病,一些预测显示,日本在巴黎大会上提出的自主贡献额度如此之低,以至于几乎无需出台任何新的政策就能达成。
美国能否提升自己的减排决心尤为重要,原因在于美国的自主贡献将于2025年到期(其他主要国家的期满时限均为2030年),国际社会已经在“敦促”美国提交2030年的减排目标,从而与其他国家保持一致。
鉴于主要经济体之间存在竞争,因此,一些国家应共同进退,减少其他国家借机“搭便车”的机会。因此,美国推出新的国家自主贡献有助于激励各国之间的协同努力。
我们不应该轻视这些挑战,但这也并不意味着希望全无。
低碳技术的成本正在下降;2015年,全球可再生能源吸引了近2860亿美元的投资,该行业的新增产能首次超越化石燃料行业。技术和实体经济的发展有可能推动外交工作的进一步深入。
同样地,其他类似G7和G20峰会这样的国际会议也应采取具体措施,鼓励各国在2020年之前提高自身的减排决心。
未来三年间,中国、德国和印度将分别主办G20峰会,而G7峰会则将在日本、意大利和加拿大召开。
这些东道主国家可以按照《巴黎协定》的要求,优先推动建立“减少温室气体排放长期发展战略”。
各主办国还可以采取措施,加大新技术研发的公共资金投入,考察研究成果奖等创新机制的使用情况,同时推进市场承诺,鼓励私营部门投资。
此外,G7和G20峰会可以为主要排放国提供平台,让他们能够讨论共同的目标,为各国在2020年之前达成新的自主贡献奠定外交基础。
在纽约举行的签约仪式是庆祝《巴黎协定》顺利达成的重要时刻,也是朝着落实《协定》迈出的第一步。但接下来,出席仪式的各国首脑必须彰显出同样的领袖风范,采取措施保证本国朝着控制气温上升不超过2摄氏度的减排目标进发。
《协定》建立了一个旨在限制全球平均气温上升的新型框架,是各国对抗气候变化进程中迈出的重要一步。
但如果在2020年之前,各国不能在实质上提升抗击气候变化的决心,《巴黎协定》面临着在完全生效前就惨遭破坏的风险。
由于目前各国的减排承诺远没有达到《协定》目标的要求,未来五年将会至关重要。
即将召开的G7和G20峰会应该为强化各主要排放国2020年之前的减排决心奠定基础。
新制度在灵活性和包容性方面有着很多优点。《巴黎协定》建立了具有法律约束力的框架,到2020年,只要有不少于55个国家加入、且其温室气体排放量占全球排放总量不少于55%,这一框架就将生效。签约仪式是《协定》生效过程中非常重要的第一步。
《协定》还确立了新的长期目标,即“确保全球平均气温较工业化前水平升高幅度控制在2摄氏度之内,并力争将升温控制在1.5摄氏度之内”。
这是各国首次就升温幅度控制在1.5摄氏度的问题达成一致。对于低洼岛屿等最易受到气候变化影响的国家而言,这是关系到国家未来存亡的大事。
同时,新制度也复杂混乱,且缺乏统一标准;虽然各国在巴黎大会上提出的自主贡献较之从前是一个很大的提升,但目前减排承诺总量和控制气温上升不超过2摄氏度所需的减排量之间仍存在很大差距,且这一差距还将持续扩大。
一项分析显示,如果目前的减排承诺量保持不变,那么排放差距就将从目前的每年约30亿吨二氧化碳当量(GtCO2e)增长至2025年的每年约110亿吨二氧化碳当量,这一数字甚至超出了目前中国的排放量。
因此,为了提高长期目标达成的可能性,2020年《巴黎协定》生效之时,各国应大幅提高各自的减排目标。
各国代表还一致同意从2018年起建立一个“能够促进对话的机制”,作为达成上述目标的一项核心工作,为各国提供机会重新审核自身的自主贡献,从而确定到2020年之时是否将扩大贡献额或者保持不变。
各国提升2020年之前减排决心的工作并不均衡。中国宣称自己的减排量预计将超出2020年目标的要求,甚至有望超出其2030年的贡献额。
但欧盟委员会关于“巴黎大会之后”的交流实际上忽视了2020年以前的机会,其制定的计划可能会保持2030年的减排目标不变直至期满。日本也因减排决心过低而遭到诟病,一些预测显示,日本在巴黎大会上提出的自主贡献额度如此之低,以至于几乎无需出台任何新的政策就能达成。
美国能否提升自己的减排决心尤为重要,原因在于美国的自主贡献将于2025年到期(其他主要国家的期满时限均为2030年),国际社会已经在“敦促”美国提交2030年的减排目标,从而与其他国家保持一致。
鉴于主要经济体之间存在竞争,因此,一些国家应共同进退,减少其他国家借机“搭便车”的机会。因此,美国推出新的国家自主贡献有助于激励各国之间的协同努力。
我们不应该轻视这些挑战,但这也并不意味着希望全无。
低碳技术的成本正在下降;2015年,全球可再生能源吸引了近2860亿美元的投资,该行业的新增产能首次超越化石燃料行业。技术和实体经济的发展有可能推动外交工作的进一步深入。
同样地,其他类似G7和G20峰会这样的国际会议也应采取具体措施,鼓励各国在2020年之前提高自身的减排决心。
未来三年间,中国、德国和印度将分别主办G20峰会,而G7峰会则将在日本、意大利和加拿大召开。
这些东道主国家可以按照《巴黎协定》的要求,优先推动建立“减少温室气体排放长期发展战略”。
各主办国还可以采取措施,加大新技术研发的公共资金投入,考察研究成果奖等创新机制的使用情况,同时推进市场承诺,鼓励私营部门投资。
此外,G7和G20峰会可以为主要排放国提供平台,让他们能够讨论共同的目标,为各国在2020年之前达成新的自主贡献奠定外交基础。
在纽约举行的签约仪式是庆祝《巴黎协定》顺利达成的重要时刻,也是朝着落实《协定》迈出的第一步。但接下来,出席仪式的各国首脑必须彰显出同样的领袖风范,采取措施保证本国朝着控制气温上升不超过2摄氏度的减排目标进发。
环保部内部机构职能管理调整、环保系统管理体制改革还有很多工作要做。我们期待着陈吉宁部长能够继续改革,在充分学习国际先进经验与避免教训的基础上,探索出中国特色的环境管理新道路。
Wednesday, August 15, 2018
商业领袖许诺加大力度尽快落实气候目标
英国脱欧公投才刚刚落下帷幕,全球商业领袖便齐聚伦敦市政厅,号召各国政府尽快批准巴黎气候合约,言语间充满了对英国脱欧公投影响气候政策进程的担心。
6月27日,商业与气候峰会在伦敦举行。来自联合国气候变化框架公约(UNFCCC)和伦敦金融城的诸位代表齐力发声,敦促整个商界将构建可持续发展和低碳经济的目标纳入未来投资决策。
各大跨国企业纷纷承诺,将引入全新商业模式和技术解决方案,并通过与公私领域机构合作,共同加快推进落实巴黎气候目标。
科学家们相信,要想保证全球变暖不超过2摄氏度,至少要将全球温室气体排放总量削减420亿公吨。而各国在第21届联合国气候变化大会(巴黎会议)上许诺的未来15年的温室气体排放削减总量却只有60亿公吨。显然,要弥合这两个数据之间的差距还要付出很多努力。
一份涵盖商界温室气体减排额度目标的最新报告
一份题为《气候变化的商业终结》的研究报告预计,通过以下5个核心倡议行动,全球商界可在2030年前完成每年37亿立方公吨的二氧化碳减排量(相当于各国在巴黎气候会议上许诺减排总量的60%)。
如果所有相关企业都能签署行动协议,未来这一数字有望上升到每年100亿立方公吨(大致与目前中国的温室气体排放量相当)。
这5个倡议行动侧重各有不同:RE100将集中帮助企业实现100%的可再生电力供应;EP100将致力于将商业能源生产效率翻番;科学基础目标将为企业发展提供技术资源支持;零采伐项目(Zero De-foresation)承诺在供应链中消除商业驱动的采伐行为;而LCTPi则将集中精力推广低碳技术。
《联合国气候变化框架公约》执行秘书克里斯提娜•菲格雷斯在其任期最后的某次官方演讲中表示:“未来4年建设的基础设施将直接影响未来人类的命运。如今我们已经制定了目标,问题是需要多久才能落实这些目标。”
据《新气候经济》估算,为保证全球经济朝着低碳和气候适应的方向转型,从现在开始到2030年,预计全球每年要在城市改造、土地使用和能源基础设施方面投入至少90万亿美元。
因此,有与会人员表示,应该尽快在绿色金融领域引入私有资本。
有发言人认为,可再生能源价格正在迅速下降,而共享经济理念则带动了很多全新商业模式的产生,这无疑创造了更多更快推广清洁能源服务的机会。
国际可再生能源署(IRENA)的统计显示,目前太阳能光伏电池板和风力涡轮机的价格大概分别下降了80%和30%-40%。
法国环境部长、第21届联合国气候变化大会主席赛格罗那•莱亚尔号召欧洲各国在明年确定碳排放的最低限价,并且突出强调了碳领袖联盟组织的作用。(碳领袖联盟由96个成员企业组成,其宗旨是力争在 2020年前将目前限价机制下的温室气体排放份额再增加一倍。)
低碳经济转型成功与否关键还要依靠新科学技术,这一观点在本次大会上得到了广泛认同。
挪威可再生能源企业Eco Hz负责人普雷本•蒙克表示:“目前已有机构将分布式电网与全新电池能源存储设备相结合,将其利用到乡村地区的公用事业设施上。
他还补充道:“随着智能电网和互联网技术的发展,循环经济也开始迅速崛起。虽然这些商业模式正式上线还需时日,但是我们发现各公司首席执行官们已经开始积极倡导商业的可持续性,其重视程度不亚于金融和市场模式。”
英国退欧的负面影响
峰会举行前几天,英国民众刚刚通过民主公投决定离开欧盟。这次公投给金融市场带来重创,市场不确定性增加,英镑价格也一度下跌到30年以来的最低点。
如今,欧洲陷入分裂,美国政坛及中国当下的经济转型前景难以预测,这些都让各国抗击气候变化的努力变得前途未卜。
菲格雷斯承认,由于英国即将脱离欧洲,未来欧盟可能需要重新调整其在《巴黎气候协定》中承诺的责任。
她表示:“如果相关方面正式启动了《里斯本合约》第50条规定,那么欧盟就需要重新审视自己的自主贡献预案,可能还需要重新调整相应的责任比例。未来2年,调整和变化肯定会难以避免。”
伦敦金融城绿色金融倡议主席罗杰•吉福德爵士重申,伦敦和整个英国在推进更广泛的低碳能源转型方面的承诺绝不会因为此次公投而发生动摇,并特别呼吁中国和印度给予更多的支持。
全新的绿色经济模式
与会成员还提到了那些“被遗忘的人们”。这些人并没有从发达民主国家的经济繁荣和平等机会中受益,而如今他们开始向西方民主世界表达自己的不满。
瑞秋•凯特是联合国秘书长任命的“人人享有可持续能源”(Sustainable Energy for All)项目的首席执行官和特别代表。她认为,绿色经济将创造更多的就业机会和新型产业,帮助西方国家通过另外一种资本主义模式解决现有的社会经济难题。
她表示:“西方世界还没有完全意识到自己适应气候变化需要付出的真正代价。我们必须要认真思考不让国内任何一个人掉队背后的真正意义。目前,如今我们对绿色投资监管已经完全改观,因为绿色投资将创造更多的就业机会。”
6月27日,商业与气候峰会在伦敦举行。来自联合国气候变化框架公约(UNFCCC)和伦敦金融城的诸位代表齐力发声,敦促整个商界将构建可持续发展和低碳经济的目标纳入未来投资决策。
各大跨国企业纷纷承诺,将引入全新商业模式和技术解决方案,并通过与公私领域机构合作,共同加快推进落实巴黎气候目标。
科学家们相信,要想保证全球变暖不超过2摄氏度,至少要将全球温室气体排放总量削减420亿公吨。而各国在第21届联合国气候变化大会(巴黎会议)上许诺的未来15年的温室气体排放削减总量却只有60亿公吨。显然,要弥合这两个数据之间的差距还要付出很多努力。
一份涵盖商界温室气体减排额度目标的最新报告
一份题为《气候变化的商业终结》的研究报告预计,通过以下5个核心倡议行动,全球商界可在2030年前完成每年37亿立方公吨的二氧化碳减排量(相当于各国在巴黎气候会议上许诺减排总量的60%)。
如果所有相关企业都能签署行动协议,未来这一数字有望上升到每年100亿立方公吨(大致与目前中国的温室气体排放量相当)。
这5个倡议行动侧重各有不同:RE100将集中帮助企业实现100%的可再生电力供应;EP100将致力于将商业能源生产效率翻番;科学基础目标将为企业发展提供技术资源支持;零采伐项目(Zero De-foresation)承诺在供应链中消除商业驱动的采伐行为;而LCTPi则将集中精力推广低碳技术。
《联合国气候变化框架公约》执行秘书克里斯提娜•菲格雷斯在其任期最后的某次官方演讲中表示:“未来4年建设的基础设施将直接影响未来人类的命运。如今我们已经制定了目标,问题是需要多久才能落实这些目标。”
据《新气候经济》估算,为保证全球经济朝着低碳和气候适应的方向转型,从现在开始到2030年,预计全球每年要在城市改造、土地使用和能源基础设施方面投入至少90万亿美元。
因此,有与会人员表示,应该尽快在绿色金融领域引入私有资本。
有发言人认为,可再生能源价格正在迅速下降,而共享经济理念则带动了很多全新商业模式的产生,这无疑创造了更多更快推广清洁能源服务的机会。
国际可再生能源署(IRENA)的统计显示,目前太阳能光伏电池板和风力涡轮机的价格大概分别下降了80%和30%-40%。
法国环境部长、第21届联合国气候变化大会主席赛格罗那•莱亚尔号召欧洲各国在明年确定碳排放的最低限价,并且突出强调了碳领袖联盟组织的作用。(碳领袖联盟由96个成员企业组成,其宗旨是力争在 2020年前将目前限价机制下的温室气体排放份额再增加一倍。)
低碳经济转型成功与否关键还要依靠新科学技术,这一观点在本次大会上得到了广泛认同。
挪威可再生能源企业Eco Hz负责人普雷本•蒙克表示:“目前已有机构将分布式电网与全新电池能源存储设备相结合,将其利用到乡村地区的公用事业设施上。
他还补充道:“随着智能电网和互联网技术的发展,循环经济也开始迅速崛起。虽然这些商业模式正式上线还需时日,但是我们发现各公司首席执行官们已经开始积极倡导商业的可持续性,其重视程度不亚于金融和市场模式。”
英国退欧的负面影响
峰会举行前几天,英国民众刚刚通过民主公投决定离开欧盟。这次公投给金融市场带来重创,市场不确定性增加,英镑价格也一度下跌到30年以来的最低点。
如今,欧洲陷入分裂,美国政坛及中国当下的经济转型前景难以预测,这些都让各国抗击气候变化的努力变得前途未卜。
菲格雷斯承认,由于英国即将脱离欧洲,未来欧盟可能需要重新调整其在《巴黎气候协定》中承诺的责任。
她表示:“如果相关方面正式启动了《里斯本合约》第50条规定,那么欧盟就需要重新审视自己的自主贡献预案,可能还需要重新调整相应的责任比例。未来2年,调整和变化肯定会难以避免。”
伦敦金融城绿色金融倡议主席罗杰•吉福德爵士重申,伦敦和整个英国在推进更广泛的低碳能源转型方面的承诺绝不会因为此次公投而发生动摇,并特别呼吁中国和印度给予更多的支持。
全新的绿色经济模式
与会成员还提到了那些“被遗忘的人们”。这些人并没有从发达民主国家的经济繁荣和平等机会中受益,而如今他们开始向西方民主世界表达自己的不满。
瑞秋•凯特是联合国秘书长任命的“人人享有可持续能源”(Sustainable Energy for All)项目的首席执行官和特别代表。她认为,绿色经济将创造更多的就业机会和新型产业,帮助西方国家通过另外一种资本主义模式解决现有的社会经济难题。
她表示:“西方世界还没有完全意识到自己适应气候变化需要付出的真正代价。我们必须要认真思考不让国内任何一个人掉队背后的真正意义。目前,如今我们对绿色投资监管已经完全改观,因为绿色投资将创造更多的就业机会。”
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